मातृ पितृ दिन लेख

2) मातृ पितृ 
                उसने कहा, “इंद्र महाराज में धरती पर नहीं जाना चाहता l मैं यहां पर खुश हूं l मैं वहां कैसे रह पाऊंगा?मैं किसी को जानता नहीं, मेरा कोई पहचान वाला नहीं, मै धरती पर कैसे रहूंगा? वहां कैसे बोला जाता है, कैसे रहा जाता है, यह सब कौन मुझे सिखाएगा ?” 
         तो इंद्र महाराज ने कहा, “देखो तुम इतनी चिंता मत करो l तुम जब धरती पर जाओगे ना तो वहां दो देवदूत ऐसे होंगे जो तुम्हारी खुशी का पूरा ख्याल रखेंगे l तुम्हारे साथ रहेंगेl मैं तुम्हें गारंटी देता हूं कि यहां से ज्यादा खुशी वह देवदूत तुम्हें धरती पर देंगेl”  
“यह सब तो ठीक है, पर मैं उनकी भाषा तक नहीं जानता l तो मैं उनसे बात कैसे करूंगा ? कैसे रहूंगा उनके साथ?” तो इंद्र महाराज ने कहा, “तुम चिंता मत करो, वह देवदूत तुम्हें उनकी भाषा भी सिखाएंगे और तुम्हारा पूरा ख्याल रखेंगे चलना, खाना-पीना, सब वह देवदूत तुम्हें सिखाएंगे और तुम्हें पता है वह दो देवदूत तुम्हारा धरती पर इंतजार कर रहे तुम चिंता मत करो वह देवदूत तुम्हारा स्वर्ग से ज्यादा धरती पर ख्याल रखेंगे l
यह कहकर इंद्र महाराज चले गए और देवता सोचते रह गए कि वह देवदूत  दो कौन से हैं l कोई बता सकता हैl वह दो देवदूत कौन है? माता-पिता जो इस दो देवदूत के शरण में आ जाता है, उन्हें दुनिया की खुशी मिल जाती हैl वह देवदूत ऐसे है कि आपके बिना देखे, बिना जान आपसे प्यार करना शुरू कर देते हैं और आप से जी-जा लुटा देते हैंl मां-बाप से ज्यादा कोई गहरा रिश्ता है, जो बिना देखे आपसे प्यार करने लग जाता हैl मां-बाप दुनिया के वह देवदूत थे जिन्हें

Popular posts from this blog

नागपंचमीचा संबंध 'नाग' ह्या सरपटणा-या नागाशी 🐍 नसून, भारतात 'नाग' हे 'टोटेम' असणारे पाच पराक्रमी नाग वंशीय राजे होवून गेले, त्यांच्याशी आहे ..!!*

चारोळीच्या गावात चारोळी क्रमाक- १८३ लोकमान्य टिळक

हातात हात पकडला पाहिजे* कविता