संविधान बनाने में जैंनोंका का योगदान

*संविधान बनाने में जैनों का योगदान !* 📔📔📔📔📔

राजनीतिक कारणों से भारत के संविधान के निर्माता के रुप में बाबा साहब भीमराव अंबेडकर को प्रचलित कर रखा है ! इसका सबसे बड़ा कारण है, कि वे दलित समाज से आते थे और दलित वर्ग उनको भगवान की तरह पूजने भी लगा है ! उनके स्मृति दिवस को भी *महापरिनिर्वाण दिवस* के रुप में मनाया जाता है ! सभी पार्टियों की मजबूरी है, कि जय-जय बाबा साहेब अंबेडकर कहते रहें !

सच यह है, कि संविधान निर्माता समिति (संविधान सभा) में 299 सदस्य थे ! कई समितियां थी ! डॉ अंबेडकर भी प्रारुप कमेटी के अध्यक्ष थे ! पर संविधान बनाने का सारा श्रेय उनके ही खाते में गया ! संविधान सभा लगभग 3 वर्ष (2 वर्ष 11 महीने 17 दिन) कार्यरत रही थी ! तब कहीं जाकर संविधान का मसौदा तैयार हो सका था ! महत्वपूर्ण तथ्य यह है, कि संविधान बनाने वाली संविधान निर्माता समिति में *6 जैन विद्वान* भी शामिल थे ! संविधान निर्माण कार्य में इनकी विशेष भूमिका रही है ! जिसके लिए जैन समाज गौरवान्वित है !

*श्रीमान रतनलाल जी मालवीय, (मलैया) सागर (मध्यप्रदेश)*

*श्रीमान अजित प्रसाद जी जैन, सहारनपुर (उत्तरप्रदेश)*

*श्रीमान कुसुमकांत जी जैन, झाबुआ जिला (मध्यप्रदेश)*

*श्रीमान भवानी अर्जुन खीमजी, कच्छ (गुजरात)*

*श्रीमान बलवंतसिंह जी मेहता, उदयपुर (राजस्थान)*

*श्रीमान चिमनभाई शाह, सौराष्ट्र, गुजरात !*

(संविधान सभा के अंतिम दिन २४ जनवरी १९५० को सभी सदस्यों के हस्ताक्षर हुए ! संविधान की तीन प्रतियां, एक हस्तलिखित अंग्रेजी में, एक छपी अंग्रेजी में व एक हस्तलिखित हिन्दी की प्रति पर सभी सदस्यों ने हस्ताक्षर किए ! पूरी प्रति चित्रों से सुसज्जित की गई ! चित्रों के माध्यम से क्रमश: पूरा इतिहास दर्शाया गया ! प्रथम पृष्ठ पर मोहनजोदड़ों से प्राप्त उस सील को दर्शाया गया है, जिस पर एक बैल अंकित है ! पृष्ठ ६३ पर भगवान महावीर का चित्र अंकित है ! पृष्ठ १५१ पर महात्मा गांधी को तिलक करती एक महिला चित्रित है, जो गांधीजी की दांडी यात्रा के समय का है ! ध्यातव्य है, कि गांधीजी की दांडी यात्रा के समय महिलाओं का नेतृत्व *श्रीमती सरला देवी साराभाई (जैन)* ने किया था !)

समस्त जैन बंधुओं को यह एतिहासिक तथ्य पता होना चाहिए ! पर जैन तो जैन हैं ! कृपया इसे अपने परिवार के सदस्यों के साथ अवश्य साझा करें ! 🌳📔📔🌳

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