जैन चिन्ह का विश्लेषण

भ महावीर स्वामी को  वंदन  🙏
आ आनंदऋषीजी म. को भाव भरा नमन 🙏
श्री प्रियदर्शनाजी म .को करते वंदन तथा अभिनंदन ! 🙏
२०२४छत्तीसगड स्वाध्याय शिबिर मे आपका पदार्पण !
आपने किया *जैन चिन्ह* का विश्लेषण करेंगे याद हरदम ॥
*जैन चिन्ह* हमारा स्वाभिमान तथा विशेषण,
इ. स. १९७४ भ.महावीर स्वामी की २५००निर्वाण शताब्दी आयी,
दिल्ली शहर में विनोबाजी भावे की अध्यक्षता मे उमंग है लहराई,
और हमने गौरवमयी*जैन चिन्ह* की  उपलब्धी  है  पाई 👌
चारो संप्रदाय के आचार्य थे विराजमान, गहन हुआ विचार,
नवकार एक, मोक्ष मंजिल एक क्यों न हो चिन्ह हमारा एक ?
जिसमे हो जैन धर्म का सार, हर व्यक्ति को हो अभिमान !!
जैन चिन्ह को लोक का आकार लिया मान,
जहा छ द्रव्य का है निवास उसके बिना न चले काम
अग्रभागपर सिद्धशिला का चिन्ह लिया धार (उल्टे छाते की तरह )
सिद्धशिला पर सिद्ध है विराजमान,
तीन बिंदू स.दर्शन स.ज्ञान स. चारित्रसे मोक्ष मार्ग का खुलता द्वार ।
स्वस्तिक दर्शाता चार गती उपहार,
नीचे रेखा नरक गती, तिरछी रेखा तिर्यंच गती, मनुष्यगती करे उत्थान ,उपरी रेखा देवगति का द्वार ॥ तीन बिंदूद्वारा जाना मोक्षगती द्वार ॥
सभी जैन एक है ,खुली हथेली संघटन का प्रतीक है,
पंच परमेष्ठी उंगलिया इसका द्योतक है.
धर्मचक्र ,२४आरे, तीर्थंकरणे तोडे बंधन सारे ।
सभी धर्म का मूल सितारा *अहिंसा* है विश्वशांती का नारा
*परस्परोपग्रहो जीवानाम*पर्यावरण का संदेश महान,
सभी जीवों के साथ मैत्री और  सहयोग है
सबका साथ तभी मनुष्य तेरा विकास है ॥
गौरव करे जैन चिन्ह पर, शाकाहार पर ,चाहे अलग अलग हो स्थान,
अपनी हो एक पहचान
*द्वार द्वार पर जैनचिन्ह हो विराजमान*.

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