पर्युषण पर्व प्रवचन नेवासा मै कौन हू ?क्या कर रहा हू?
*पर्युषण पर्व प्रवचन 2024 रविवार, नेवासा*
मै कौन हू...?
मैं कौन हूं
भगवान दशवैकालिक सूत्र के चौथे अध्याय में कहा है आपका कल्याण किसमे है ?
बोलो आपका कल्याण किस मे है? पहिले सुनना श्रुत करना जीवन मे महत्वपूर्ण होता हैl
सुने बिना आगे नहीं बढ़ सकतेl सुनना,श्रुत करना परमात्मा दशवैकालिक सूत्र के चौथे अध्याय मे कहते हैं
*सोच्चा जाणइ कल्याणं सोच्चा जाणइ पावगं उभयंती जाणइ सोच्चा, जं सेयं तं समायरे*
*ढाणांग सूत्र मे कहा है कहानी*
क्या सुनना चाहिए ये बहुत महत्वपूर्ण है।
मोबाईल पर गीत सुना या उसी मोबाईल पर विरवानी सुना ये महत्वपूर्ण है।
मै कौन हू ?मै श्रावक हू। जिसके पास सुनने की कला है वो श्रावक होते है..!
चार घड़े हैं ।
श्रावक ठाणांग सूत्र में बहुत ही सुंदर ढंग से कहा है 4 घडे
1) घडा पानी भरा है लेकिन ओ खाली हो रहा है?
ऐसा क्या हो रहा था ?
क्योंकि उसको नीचे से छेद था उसी तरह अपने घडे को जो छेद है इस कान सुनना और उस कानसे छोड देना
मराठीत म्हटलं जातं *सोनारने फुंकली नळी इकडून तिकडे गेले वारे* या कानाने ऐकायच एक कानाने सोडायचं. ये हुआ पहला घडा इसी तरह के कुछ आदमी रहते है।
2 ) जो दुसरा घडा था वो उलटा रखवा दिया *मराठी मे कहते है ना पालथ्या घड्यावर पाणी* घड़ा उल्टा रखवा दिया तो कैसा भरेगा पालथ्या घड़ियावर पानी *तुम्ही कर बड़बड़ मी आहे खंभीरघट*
3) घड़ा नल के बाजू था। भर नहीं रहता है।क्योंकि बाजू ओ नल के बाजूने रखा था। उसके ऊपर पानी की छींटे गिर जाती थी गीला होता है। लेकिन भरता नहीं है ।
4 )घड़ा लबालब पानी से भरा था। खूब तृप्त होता है। और औरों को भी तृप्त करता है कुछ मुमुक्षु आत्माएं होते हैं। आप सब जन कहां हो सिचुएशन देखकर हम बदलते हैं। हमारा परपज हमारा उद्देश चौथ घड़े में आना उसके लक्षण क्या है?
श्रेणिक राजा परिवार प्रजा के साथ परमात्मा तीर्थंकर भगवान महावीर के पास
भगवान हे चार गती के कारण क्या है? नरक गती, तिर्यंचगती, मनुष्य गती,देवगती जाने का...!
हे देवानुप्रिये मनुष्य आपने कर्म से गति की प्राप्ति कर सकता है जो पहला घडा था वो याने ऐसे लोग होते है प्रभू की वाणी जिनवाणी सुनते है और छोड देते है उसी प्रकार जो वाणी सुंने के लिए आते है और पलट के हुए घडे के तरह उसके उपर कुछ भी असर नही होता ऐसे भी लोग होते है। वो घडा नल से बाजू मे रखा जाता है खाली पाणी उस घडे को गिले कर सकते है । उसी तिसरा प्रकार है यहा स्थानक मे मंदिर मे आते है । प्रभू की वाणी से थोडे देर तक बदल जाते है किसी को स्मशान विरक्ती आती है और यहा से जाने के बाद जो करना है वही करते है।
चौथा घडा जो है।
परमात्मा कहते है जीव के जीवन के गति के चार कारण होते है
तभी राजा श्रेणीक परमात्मा को पुछते है ।भगवान मै यहा से कहा जाऊंगा..? देशना सुनकर भाव दशा बदलती है उसे उनकी दिशाही बदलती है।
इसीलिए वितरागवानी सुननी चाहिये सुनके उसको ग्रहण करना चाहिए इस चार घडे मे अपना नंबर कहा लगता है ये खुदने सोचना चाहिए और खुद में बदल करके 84 लाख जीवायोनी पार करते हुए बडे ही कष्ट से हमे मनुष्य जन्म मिला है।
देशना सुनकर भाव दशा बदलती है। उससे जीने की दिशा बदल जाती है ।
मुझे बहुत क्रोध आता है।क्या करूं ? मैं कौन हूं?मैं क्या कर रहा हू?
रेती भी होती है माटी भी होती है बरसात होती है तो माटी में बीज अंकुरित होते हैं। मुलायम माटी बनो।
पर्युषण प्रारंभ
नया नया गाना सीखे गायक ने गायन प्रोग्राम रखा था। ओ
एडव्हरटाइजर्स शो कर रहा था,सिंगर बढ़िया था। पब्लिक बहुत, सिंगर खुश भी खुश था तबाम तमाम पब्लिक के साथ उन्होने अपना गीत पेश किया वेलकम सॉंग वेलकम गीत गाने के बाद लोगो ने उनको वन्समोर दिया वो खुश हो गया लेकिन वापीस लोगोने वन्स मोर बोला एक बार हुआ दो बार हुआ तीन बार हुआ अभी चौथी बार वही गाना वापीस दौराने के लिए पब्लिक ने कहा तो सिंगर बोला मै आपके लिए बहुत सारे सॉन्ग ले आया हूं ।
श्रोता वृंदसे कुछ बोले पहले ये वेलकम गीतही अच्छा आना चाहिए इसलिये आपको हम बार बार दौराने को बोल रहे है।
आज हम मनुष्य गति में है वन्स मोर चलेगा पर तीर्यचगति में वन्स मोर चलेगा क्या?
नहीं
इस *पर्युषण पर्व में हमें सीखना है पाप-पुण्य, सुख-दुख क्या है ?और कैसी धर्म की आराधना करनी चाहिए? धन के साथ धर्म आराधना करना याने चातुर्मास मे चार्जिंग करने सरिखा है । शुभ भाव लाने के लिए चातुर्मास है।चातुर्मास पर्युषण पर्व जिम है। फिजिकली,मेंटली सर्विसिंग के लीये और जीवन की गाडी चार्ज करने के लिए महत्वपूर्ण है।*
येताना काही आणायचं नसतं जाताना काही न्यायचं नसतं मग कशासाठी जगायचं असतं या प्रश्नाच्या उत्तरासाठी स्थानकात यायचं असतं
*नो ऍडमिशन विदाऊट डिव्होशन* महत्वपूर्ण समर्पण है। सिझन्ती,बुझन्ति,मुच्चंति याने सिद्ध होते है। बुद्ध होते है। मुक्त होते है। और मुक्त हो के जन्म मरण के फेरे टाल देते है । बोध आत्मा को मिलेगा सिद्ध हो जाओगे।
*परिणीवायंती पापोसे निवृत्त हो जाओगे। सव्व दुःखाना परीयती सब दुःख से मुक्त होना।*
समर्पण गौतम स्वामी का अपने प्रभू के उपर था,लेकिन जो गोशालक था उसका समर्पण नही था श्रद्धा नही थी। उसकी वजह से उनकी कौन सी दशा हो गई आप सबको पता है ।
गौतम स्वामी अंगुष्ठ अमृत वसे भगवान ने गौतम स्वामी से कहा हे गौतम आनंद श्रावक से माफी मांगो...समर्पण.... समर्पण था लेकिन गोशालाक ये भगवान से समर्पित नही थे।वो भटकते रहे।उन्होने भगवान पर भरोसा नही। समर्पण नही। उसकी वजह से भटक गये।
*जमाली भगवान की जवाई थे। उन्होने भी समर्पण नही किया। भटकते रहे।*
*अर्जुन माली छ: जीवो की रोज हत्यारे , पर परमात्मा से समर्पित थे।इसलिये जीवन के दुःख क्रोध का प्रतिक्रमण करना। समताधारी बनना।*
सब अच्छा है *लेकिन* यह शब्द नकारात्मक सोच सोचने के लिए प्रवृत्त करता है ।
धृतराष्ट्र - श्रीकृष्ण ये पांडव मेरा बहुत ख्याल रखते है मुझे प्यार दुलार करते है *लेकिन* ये शब्द से कृष्ण के कान उपर हो गये। और कहने लगे राजन लेकिन याने मै समझा नही।
*श्रीकृष्ण,मुझे भीम को देखा तो भी गुस्सा आता है। ऐसा क्यो होता है मुझे समझ मे नही आता?*
श्रीकृष्ण- राजन ये सारा अपने पुनर्जन्म का लेखाजोखा है।
धृतराष्ट्र - श्री कृष्णा ये कैसे?
श्रीकृष्ण जावो देखो...।और पीछे जाओ ....!और पीछे जाओ...!कौन से जन्म मे क्या किया जाओ पीछे देखो *सौ जनम के बाद101 जनम मे दूध राष्ट्र राजा था और हंस भीम था ए हंस को सो बच्चे थे। हंस को मान सरोवर जाना था। सफेद मुलायम बच्चों को कहा रखू इतने दूर तक नही ले जा सकता हु । ये सोचते हुए वो पहले जन्म का हंसरूपी भीम राजा के पास पहुंचा राजा की बहुत ही प्रशंसा सुनी थी। राजा अच्छे दिलवाला था।मै क्यू ना मेरे सौ बच्चों को राजा के हवाले करू। इसीलिए वो राजा के पास आया कुछ दिन तक राजा के पास उसके सरोवर मे रह गया बच्चों का दिल लगने लगा कुछ दिनो के बाद राजा को बच्चों की जिम्मेदारी सोफ कर ओ मान सरोवर चला गया। मै आते तक मेरे बच्चों की देखभाल करना । राजाने आश्वासन दिया और वो चला गया।
कुछ दिनो के बाद राजाने एक बच्चे को सेहलाते हुए उसका मुलाम स्पर्श उसके अंतर्मन को विपरीत विचारून से उसको घेर लिया। और रसाई वाले के आचार्य को बुलाया हर रोज एक एक बच्चे को करके उसने उनका भोजन किया।
कुछ दिन लोटणे के बाद हंस राजा के पास आया और कहने लगा मेरे बच्चे कहा है?
तू राजाने बोला आचारी को पूछो...!आचारी के पास गया और पूछा उस आचारी ने सारी हकिकत हंस को बता दी। हंस के आखो मे पाणी आ गया।बच्चो के विरह से ओ तडफता रहा।मेरे कोमल बच्चों को निगाल लिया। आपने बच्चों के लिए तडफता रहा। और उसने उसके बारे मे शाप दिया। आप भी तडपयेंगे बच्चे के लिए।
*श्रीकृष्ण राजन धृतराष्ट्र आपका एक कर्म है उससे आप उसका प्रतिक्रमण करो प्रतिक्रिया मत करो। धृतराष्ट्र ने प्रतिक्रमण करके आपणा समर्पण किया