क्या करे मन शांती के लिये

क्या करे मन शांती के लिये चंदुलाल जी आपने पत्नी को बहुत चाहते थे पत्नी का निधन बहुत चोट लगी दिमाग को लेकिन उनकी 13 साल की बिटिया जो परी थी उस परीने पापा को सांभालने की बहुत कोशिश की पापा के साथ मे रहना पप्पा के साथ बातचीत करना पप्पा कोकिला ना मला ना इतना नही तो रात को सोते समय पापा के पाव दबाना  जब पापा खाना नही खाते तो एक निवाला माँ का एक निवाला अपनी प्यारी बिटिया परी का ऐसा करकर के उन्होने क्या किया उनको खिलाया और उनके तबीयत का ख्याल रखा  पापा अपने पत्नी के जाने का दुःख धीरे धीरे कम होने लगा आपको मालूम है मुसिबत ये आती है तो चारो और से आती है आदमी को घेर लेती है बिलकुल उसी तरह परी बिटिया की तब्येत बिगड गई उसको हॉस्पिटल किया गया सलाईन लगाया लेकिन आया हुआ बुखार कम न होते बडने लगा यहा चंदू लालजी की परेशानी बढ गयी चार दिन हो गये बच्ची का बुखार कम नही होता था नवकार महामंत्र का जप चंदुलाल जी कर रहे थे लेकिन होने को कोई नही टाल सकता  आखिर पाचवे दिन ऊस परी की लाश घर मे आई परी ही जगत से  चली गई आपने पत्नी का दुःख तो इस बिटिया ने हलका करवा दिया था लेकिन अब घर से जो प्यारी सी बिटिया भगवान ने दि होती वो भी चली गई क्या करे चंदूलाल जी की तब्येत और खराब हो गई खाना पिना छोड दिया दुकान जाना छोड दिया और खाली उस बिटिया के यादगार मे रोते रहे क्योंकि इतनी अच्छी बिटिया भगवान ने हमको दी थी बहुत दुबले पतले हुए  चंदुलाल जी को सपना आया या वो हो जागते हुए सपना देख रहे थे ये देखते देखते हो देवलोक मे चले गये ऊस देवलोग मे पंगती बद्दल छे छे बढीया हाथ में दिये लेके ऊस डेव्हलप मे जा रही थी उन्होने देखा अरे ये जो पर्याय है वो पर्याय तू मेरी बेटी परी जैसी दिख रही है काश मेरी बेटी होती तो और रोने लगे रोते रोते ही वो देख रहे थे पर्याचेचे पंक्तियों में शिस्तबद्ध जलते दियों को लेके चल रही थी लेकिन एक परी का दिया बुझा हुआ था  वो सोचने लगे अरे सब परियों  के दिये जल रहे है ये की परी के हात का दिया पूजा हुआ था इसलिये वो दिया जलाने के लिए हो परी के पास चले गये माचिस की तिल्ली निकली  और उस परी का दिया जलाने लगे दिया जलाया और उस दिया के प्रकार झोपणे उनको परी बिटिया का चेहरा दिखाई दिया वो देखते ही चौक उठे अरे येतो मेरी बेटी भरी है परी अरे परी बिटिया तु यहा हा पापा मै पृथ्वी लोक परती तभी भी आपके साथ परि जैसी ही रहती थी आपने मुझे रखा था यहा देवलोग मे चली आई मुझे परी जैसा ही रखते है अरे बिटिया ये सब ठीक है लेकिन सब परियों के लिये जल रहे है और आप का दिया बुजा हुआ  ऐसा क्यू बोल मुझे दिया जलाने के लिए मै क्या करू कुछ भी मुझे बोल मे सब कुछ कर सकता हु तेरा दिया जलाने के लिए पापा मेरा तो दिया है जलता है लेकिन भुझ जाता है  बोल मै क्या करू तू तेरे लिये कुछ भी कर सकता हु खाली तू बोल अपने बिटिया के लिए पापा तो कुछ भी कर सकते है उन्होने बोला बोल बिटिया मै क्या करू पापा मेरे तो दिया हर दिन जलया जाता है लेकिन वो बुझ जाता है पापा  मै क्या करू बोल बिटिया पापा जब दिया जलाया जाता है तब आप मेरी यादो मे रोते हो और होता रोया हुआ आसू का आना दिया बुजा देता है बोल बिटिया फिर मे क्या करू पापा आप इतना ही करो दुःखी मत रहो रो मत आयुष्य कर्माने ने जो जीवन दिया है ऊस जीवन को बडे प्यार से आनंद से जिया करो ये तुम्हारी परी तभी खुश रहेगी जब आप हस्ते रहेंगे और दिया लगाने के बाद आपके आसू उस दिये पर टपके तो दिया भी बुझ जाता है  मेरी लाडो तू बोल मे क्या करू तेरे लिये तेरा दिया जलता हुआ मुझे भी पसंद है गुडिया पापा जनम मरतो किसी के हाथो मे नही है ये तो अपने आयुष्य कर्म का फल है जनम मरण येतो कपडे बदलणे जैसा है ये तो व्यवस्था बनाई है आत्मा तो अनंत काल से अविनाशी है सुख दुःख हे आपने कर्मो का फल है तो बिटिया मे क्या करू मुझे बता पापा पृथ्वी ग्रह पर आपको मुस्कुराना पडेगा ये तुम्हारे बिटिया का दिया जलता हुआ देखने के लिए आप कभी भी दुख मे नही रहेंगे आखोमे आसु नही लायेंगे हा मै एक कर सकता हु मेरी बिटिया के लिए मुझे करना पडेगा ध्यान मेरे को हमारी भाई बहन जनम मरण आपके कर्मो का फल है ये जिंदगी वापस नही मिलेगी जो आया वो चला जायेगा वो रहने वाला नही है इसलिये हमारे आत्मा का कल्याण करने के लिए हम विवेक रखके आनंदी रहना बहुत जरुरी है

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