बुढापा आदमी के लिए वरदान है
बुढापा आदमी के लिए वरदान है
कैसे सवारे बुडापे को
बचपन ज्ञानार्जन ,जवानी धनार्जन बुडापा पुण्यार्जंन के लिए होता है I बुडापा शाप नही वरदान होता है I
आपके पास अपनी पत्नी अपनी पसंत हैI अपने मा बाप, अपने घर रहना आपका पुण्य है I
जवानी मे अपने बुडापे की तयारी करनी चाहिए I आदमी को दो बार घर निकलना चाहिए बचपन मे और पचपन मे I
नदी सरिता अंगुली सरिखा उगम- झरना,
जवानी बालपण शैशवावस्था सरिता जवानी ,
सागर की और जाना याने बुडापा
सागर से मिलना याने अनंत मे विलीन होना-- ना यमुना ना जमुना तरह जो दीर्घ जीवी होता हैI उसको बुडापा आताही हैI हमारा जीवन सुरज की तरह गतिशील हैI भोर हुई हम मा के पेट मे आये, जन्म हुआ प्यार हुआ जवानी सांजा ने हमारा बुढापा रात को आदमी की खतम कहानी हैI
बचपन से ज्यादा मूल्यवान जवानी, जवानी से ज्यादा मूल्यवान बुढापा होता है बुडापा अनमोल अनुभव का खजाना है किस्मत वाले ओ लोक होते है जिनके घर मे बुजुर्ग व्यक्ती होते है Iहर व्यक्ती को जवानी में ही अपने बुडापे की तयारी करनी चाहिए बचपन के बाद शांती, की मुक्ती की, भक्ति की अवस्था करनी चाहिए I आराधना करनी चाहिए I
ब्रह्मचर्य आश्रम शिक्षा संस्कार के लिए, गृहस्थ आश्रम सुख समृद्धी के लिये ,वानप्रस्थ आश्रम धर्म कर्म के लिए ,संन्यास आश्रम शांती मुक्ती के लिये, आदमी दुसरे आश्रम मे क्यू रममान होता है 60- 70- 75 साल का हो गया तो—
कथा एक आदमी अमेरिका कॅप्सूल 25 साल कम नजर आता है तीन कॅप्सूल साथ मे खाये --तीन साल के बाद बेटा भारत मा बेटे को लाने को कही गोदी मे बच्चा ये क्या ये अपना भेजा कॅप्सूल का परिणाम है --बाल कालेकर के बुडा पे को ठगा सकते है पर बचा नही सकते-- बचपन मे शिक्षा संस्कार दो दशरथ को वैरागी कैसा प्राप्त हुआ?
दशरथ आया आईने के पास खडे हो गये उन्हे देखा बाल सफेद मिला और अब तो निकलने की बेला आ गई हैI तो उन्हे ने राम के राज्याभिषेक की तयारी की रानी ने कहा रात को तो आप दुनियादारी मे ये अब क्या हुआ राजन ने कहा मेरे बाल सफेद मिलेI
बाल पके मथे के अब राग अनुराग का भार उतारू ,
मोह माया पान किया आत्म शांत का अमृत चाकू
जीवन मे अंतिम पढाव में कर्म करो और दीक्षा धारो
आपने दस साल माँ की अंगुली छोड दो ,
बीस साल खिलोने से खेलना छोड दो ,
30 साल लाईन मारना छोड दो ,
40 साल हॉटेल में खाना छोड दो,
पचास साल रात्री भोजन त्यागो ,
60 साल व्यापार से मुक्ती लो ,
सत्तर साल ब्रह्मचर्य का व्रत लो
ऐंशी साल भारी खाना छोड दो
सौ साल शरीर को छोड दोI
गीत -सावधान सावधान वाचे बोला अरिहंत नाम वाचे बोला राम नाम सावधान सावधान