[5/7, 6:28 AM] Surekha Katariya: करोना मे संजीवनी देनेवाले देवदूतलेखिका .. डॉ.श्वेता नीलेश राठौड़ (कटारिया) आपको बहोत प्यार... मेरे इस शब्द सेतु के माध्यम से ......कृतज्ञता एक महान गुण है !जो दिया है हम उसके ऋणी है इसकी अभिव्यक्ती ही कृतज्ञता है और औसर आने पर उसे समुचित रूप से लोटा देना इस गुण का मूलमंत्र है. इस एक गुण की बल पर समाज और इन्सान मे एक सहज संबंध विकसित हो सकता है, भावना और संवेदना का जिवंत वातावरण निर्मित हो सकता है .....ये मैने करोना के दोरान खुद हर रोज मेहसूस किया है|श्रेयस शलाका बहन का स्नेह शब्दों से बया नही किया जा सकता है ....चाहे मेरे जिंदगी मे कोई भी स्थिती हो हमारे बीच में प्रेम का ऐसा धागा है जिसे केवल मेहसूस किया जा सकता है और कुछ नही । मै आप से उम्र मे बडी हू आप दोनों मुझसे उम्र में छे सात साल छोटे हो..... लेकिन एक बडा सा एहसास आप दोनों को अक्सर बडा करता है मेरे लिये हर मायने में। शलाका श्रेयस हर वक्त मम्मी पापा ने हमे यही सिखाया की गलत विचार से, गलत व्यवहार से ,गलत जुबान से, गलत नीतीसे ,गलत वर्ताव से हमे कुछ भी नही करना ...जिंदगी में कुछ भी नही करना ...आज करोना के दोर मे गुजरते वक्त मुझे हर पल ये एहसास रहा है उपरवाला सब कुछ अपने खुद के कर्मो से सवार देता है ।पूरे इक्कीस दिन करोना मे जो शलाका ,मम्मी, श्रेयस ,निलेश और कई जन जैसे शितल दीदी, सोनाली भाभी ,डॉक्टर शिरसागर , डॉक्टर काटे,ढेरे मामा ,रवी कटारिया, आनंद बाफना ,रवींद्र राईसोनी ,डॉक्टर जेम्स ,डॉक्टर बोरा ऐसे कई देवदूत मेरे जीवन मे संजीवनी देने का काम उन्होने किया है मेरे लिये दुवा के साथ दवा का बी काम इन्होंने ने किया है.... हॉस्पिटल में बेड मिलने से लेकर .... इंजेक्शन मिलने तक..... टिफिन को लेकर हर रोज हॉस्पिटल तक पोहोचणे तक...... हर एक बात मेरे लिए एक भगवान हो कर की है! मेरा ये पुनर्जन्म परमात्मा की पुजा के लिये तो हुआ है लेकिन इन सब व्यक्ती मे मै परमात्मा मेहसूस करती हू ।मे सभी का मनसे धन्यवाद करती हु जिन्होंने मेरे लिये इतना कुछ किया और भी बहुत कुछ कर रहे है मैं नतमस्तक हुं शलाका, श्रेयस, सोनाली भाभी ,शितल दीदी आपके प्यार से और स्नेह से अभीभूत हू।शलाका ने जिस प्यार से एक बहन,भाभी से बढ़कर जो दोस्त बनकर मुझे संवारा हे...रात को ३ बजे आकर हात लगाकर मेरा बुखार बार बार चेक किया है, ओजस आनंद को अपने खुद के बच्चो की तरह अपनापन दिया प्यार दिया ये मेरे उज्वल भविष्य के लिए एक प्रखर सूर्यकिरण है।जिसका प्रकाश पूरी जिंदगी हमारी प्यार की डोर को उजाला देता रहेगा।मम्मी और शलाका .....रखती मेरा ध्यान हमेशाकरती ना आराम तककरोना में पौष्टिक पदार्थ मुझको रोज परोसेसुबह से लेकर शाम तक.....भाई बहन का प्रेम सिर्फ वही समझ सकता है जिसके जीवन मे बहन का अस्तित्व हो या फिर बहन की कमी मेहसूस कर रहा हो ।यह प्रेम का एक ऐसा बंधन है जो कभी प्रत्यक्ष नही होता लेकिन इसका डोर इतना गहरा होता है जिसे तोडना लगबग नामुमकीन सा होता है और श्रेयस तुम्हारे और मेरे बीच मे ऐसा ही कुछ है की भगवान के बाद हर मुश्किल समय मे तुम मेरे साथ होते हो ।हर एक मुष्कील घडी मे अपना किरदार निभाते हो ।करोना मे क्वारेंटाइन दोर मे हर पल, हर क्षण मम्मी और नीलेशजी मेरे जीवन का आधार स्तंभ ,मेरे शिक्षक मेरे मार्गदर्शक ,मेरे अच्छे मित्र, हर समस्याओ मे दुःख में ,विपत्ति यो मे मेरे साथ खडे रहे और एक प्रेरणा देते रहे। आप सभी ने भी व्हाट्सअप से,फोनसे बातचीत करके मुझे आशीर्वाद प्रधान किये l उसी वजहसे मै घर आई हुl दोस्तो आज मे बहुत खुष नसीब हू जीसे पूरे परिवार में ,ससुराल मे , मैके में, ननिहाल में ,समाज में .....हर एक व्यक्ती भगवान के रूप मे प्राप्त हुआ और मेरे जीवन के मंदिर की हर एक आकृती सुंदर् बनती गई.......लेखिका....डॉक्टर श्वेता नीलेश राठौड़ (कटारिया)9922054546[5/7, 6:28 AM] Surekha Katariya: माझ्या सर्व साहित्य प्रेमिकांना नमस्कार🙏 आपल्या आशीर्वादाने, शुभेच्छाने श्वेता घरी आली तिने व्यक्त केलेल्या भावना पाठवीत आहे आपलीच भगिनी सुरेखा

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