, बुढापा

बुढापा
3/6/2022
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पारिवारिक स्नेह मिलन हेतू  , लगबग देड सौ परिवार के साथ मिलने का मोका मिला। तभी 40 प्रतिशत परिवार मे बुजुर्गों के हालत पर सोचने जैसी बात थी । उसमे के कई बुजुर्गने सवाल उठाया
*सवाल ऐसा था, की आज के जमाने मे हमारे बच्चे बुढापे का सहारा बनेंगे, ऐसा मानना ठीक है ,या नही?* 
देखिये , हर एक बच्चों ने मा- बाप को बुढापे मे संभालना चाहिए l उनका सहारा बनना चाहिए यह उनका कर्तव्य हैl ये बात तो सही हैl, ये हमारे भारतीय संस्कृतीका संस्कार है l 
          लेकिन बहुत सारे परिवार मे मैने देखा है बच्चे मा- बाप के प्रॉपर्टी मे अपना हक्क जताते है ।लेकिन अपना कर्तव्य निभाने मे पीछे हट जाते है ।इस समस्या का समाधान के लिय भारत सरकारने, शासन ने कुछ  ऐसे कानून भी करे है l
लेकिन आज मा बाप ने क्या करना चाहिए...?यह सोचने की बहुत जरुरी है...! 
 मा - बापने ये तयारी करनी चाहिए ,की बच्चो को बुढापे का सहारा ना माने  अगर वो आपकी देखभाल करते  है तो वो आपका किया हुआ संस्कार  है l घर मे हमारे कृति से ही बच्चों को हम संस्कार देते है ।
        हम ने  हमारे मा- बाप की जो सेवा की है, वो, सब बच्चे देखते है । लेकिन इसके बावजूद भी सब देख के ही बच्चे मा- बाप का सहारा बनने में इंकार करते है।
यह सोच समझके , जान के , शांततापूर्ण आनंदी जीवन जीने की  पुरी  तयारी करनी चाहिये । 

                बुढापे मे हमे खुद के बलबुतेपर जिना हैl बच्चो ने हमे कहा नही था हमे जनम दो l हमने जनम दिया है l यह हमारी सोच थी l आवश्यकता थी l अब बच्चों को जनम देने  का निर्णय लिया है,तो उनको बडा करना, उनका पालन पोषण करना, उनको खुदके  पैरो पर खडा करना ।यह हमारा कर्तव्य है l जो हमने किया ।

       लेकिन हमारे बुढापे की व्यवस्था हम खुद करेंगे l हम किसी के सामने हाथ नही फैलायेंगेl यह हर मा - बाप को निश्चित करना चाहिए l ऐसी व्यवस्था करनी चाहिए। बुढापे के सहारे के लिए हम जो पैसा रखते है l वो किसी भी हालात मे हम जब तक जिंदा है,तब तक किसी को ना दे ।
        कहने का मतलब बच्चा बोलता है, मुझे व्यवसाय करना है, l लोन नही मिल रहा हैl आप के पास पी एफ के पैसे है, या , आपका फिक्स डिपॉझिट है । वो मुझे धंदे के लिए  दे दो...।ताकी मैं व्यावसाय कर सकू व जीद्द करता है और मा- बाप बच्चो के प्यार में आकर  आपना सेविंग देकर, बुरी तरह मर जाते  l 
          ऐसा कभी न करे lये अपना सुरक्षा कवच है।
         उस सुरक्षा कवच को आप जिंदा है तब तक उसे पुरी तरह सुरक्षित रखेl  । किसी भी हालात मे उसे हात न लगायेl उसकी बहुत आवश्यकता है lआज के जमाने मे अगर हम यह नही करेंगे तो बहुत पछतायेंगे, *क्युकी बच्चों  ने अपना कर्तव्य अमल मे लाना चाहिये और उसके उपर हमारा जीवन निर्भर है तो , बच्चों की कुछ शाश्वती नही दे सकते* l ऐसे कुछ परिवार मे दिखाई दिया है
         साधुसंत कहते है  जब प्यार बाटा तो रामायण लिखी गई । संपत्ती बाटी तो महाभारत लिखा गया। हर एक मकान  मे अपने अपने घर की व्यवस्था होती है । घर के भी कुछ रीत रिवाज  होते है । घर का संविधान होता है। नदी को दो किनारे होते है ।उसकी वजह से उसका अस्तित्व शाबित रहता है। इसलिये नदी कहलाई जाती है। पानी के बाफ को डबे मे बंद कर ने से बडे बडे इंजन चल सकते है । 
        इसीलिए ऊर्जा को सैला ने के लिए पैसा तो जरुरी है। इसका ध्यान हर एक ने रखना जरुरी है। लेकिन रिश्ते अंकुरित होते है प्यार से ,जिंदे रहते है संवाद से, म्हैसूस होते है संवेदना से और जिये जाते है दिल से ,मुर्झाया जाते है गलत व्यवहार से और बिखर जाते है अहंकारी भावसे...! इसीलिए जैसा कर्म करेगा वैसा फल होगा । जिंदगी मे अच्छे कर्म करना हरेक का फर्ज है ।संपत्ती की पुंजी के साथ, सकारात्मक दृष्टिकोन बहोत महत्वपूर्ण है।
       हम देखते है जिस घर मे पत्नी समजदार हो वह घर मंदिर बनता है  । जिस घर मे पती-पत्नी समजदार हो घर स्वर्ग बनता है और जिस घर मे माता पिता, बच्चे, संस्कारित हो वो घर तीर्थक्षेत्र बनता है। इसिलीऐ लिये संस्कार का संस्करण बहुत महत्वपूर्ण है l
           *हमारी सुरक्षा हमने कि  है, इसके बावजूद बच्चे हमारा खयाल रखते है, प्रेम से रहते है, तो यह हमारा अच्छा कर्म है और हमारे संस्कार का ये संस्करण है। 

      तो भी समाज में, कुछ घरों में हमारे भारत देश में विचित्र परिस्थिती नजर आती है। इसीलिए भारतीय मा- बाप को सीखना पडेगा , आज काल के मा- बाप बहुत विचित्र परिस्थिती मे  गुजर रहे है। एक तो वह अपनी पूरी जिंदगी बच्चो को खडा करने मे व्यतीत करते है ।
         *और बुढापा बच्चे सवारेगें ऐसा मानते है* ये अनुमान बहुत प्रतिशत मामलो मे सही नही होता । फिर बहुत बुरे हालातो मे अपना बुढापा निकालना पडता है । ऐसी स्थिती किसी की नही  होनी चाहिये।
 युरोप, अमेरिका, फॉरेन कंट्रीज मे ऐसी सिच्युएशन क्रिएट होने के कारण वो लोग अब खुद  को सवार रहे है ! 
       एक फॉरेनर का लडका  मुलाखत लेने  घर आया था । उसने मेरे बेटे और बहू को घर मे देख कर पूछा ये तो , आपका घर है ना? आपके घर मे ये दोनो रहते है ।ये जानकर उसे बहुत अचरज लगा  । वो बोला केवल भारत मे ही ऐसा देखने को मिलता है। हमारे देश  मे लडका उन्नीस, बीस साल का होते होते ही मा बाप उसे खर्चा देना बंद करते है। 
          मा- बाप कहते है आगे की पढाई करना तुम्हारी जिम्मेदारी है ।तुम्हारा जीवन तुम्हारी जिम्मेदारी है l बीस साल तक  मा बाप सहाय्य करते है । हमने हमारा कर्तव्य पुरा किया , अभी आप आपका जीवन सवारो...  । आगे की जिंदगी मा- बाप अपने खुदके लिये गुजरते  है । 

       लेकिन हमारे यहा  जिंदगी भर मा- बाप अपने बच्चों के लिए जिएंगे। बुढापा के लिये जमा कि हुई रक्कम खुद के लिये खर्च करने के बजाये प्यार के खातिर बच्चों को दे देते है। आपणा सुरक्षा फंड भी खर्च , करते है और फिर फिर पछताते है । 
        ऐसी स्थिती नही आणी  चाहिये ।इसलिये बच्चों को बुढापे का सहारा बनेंगे यह, अपनी सोच न रखे ।
     लेकिन उनके साथ बहुत सुंदर रिलेशन रखे । आपणा सुरक्षा कवच रिझर्व करे। इसके बाद भी बच्चे आपके प्रती प्रेम के संबंध रखते है ।तो इससे बढिया बात कोई नही....! ये बुढापा सवारने का बहुत ही सुंदर तरीका हैl तो अभी बुढापे की चिंता मत करिये हस्ते हस्ते खुद को सवारीये l

प्रा. सुरेखा प्रकाश कटारिया, राष्ट्रीय महिला उपाध्यक्ष श्री ऑल इंडिया जैन कॉन्फरन्स नई दिल्ली. 
चिंचवड पुणे 33.